Saturday, 17 November 2012

घिसाव 
भागवत शरण झा अनिमेष

आदमी का मतलब रुपैया 
घिसते-घिसते अठन्नी 
घटते - घटते  चवन्नी 
बिकते - बिकते धेला 
टिकते - टिकते छदाम 
और अंततः 
हे राम !

भागवत शरण झा 'अनिमेष'
वरिष्ठ कर-सहायक 
आयकर विभाग, पटना  बिहार।

No comments:

Post a Comment