पूरा का पूरा चाँद
अभिषेक चन्दन सावर्ण
पूरा का पूरा चाँद
मनपोखर में देखता हूँ
ह्रदय की गति में
सांसों को टेकता हूँ
चाँद को देखता हूँ
शांत नदी में
किनारे बैठ झांकता हूँ
दूर कहीं गगन में
सारे कंटकों को फेंकता हूँ
चाँद को देखता हूँ
कवि
गढ़ो (नवसृजन - पुनर्दर्शन )